251 कुण्डीय महायज्ञ में डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी का दिव्य उद्बोधन— छत्तीसगढ़ के हसौद ग्राम में आत्मदीप जागरण का आह्वान
छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान आज देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी रायगढ़ जिले के हसौद ग्राम पहुँचे।
कार्यक्रम स्थल पर सहस्रों श्रद्धालुओं, मातृशक्ति, युवा साधकों एवं स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी, छत्तीसगढ़ कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब जी एवं श्री नरेंद्र नयन शास्त्री जी की गरिमामयी उपस्थिति ने इस आयोजन की महत्ता को और अधिक बढ़ा दिया। सभी ने अत्यंत आत्मीयता, श्रद्धा और उत्साह के साथ आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी का भव्य स्वागत किया। 251 कुण्डीय यज्ञ स्थल का सम्पूर्ण वातावरण गायत्री महामंत्र की दिव्य और मंगल ऊर्जा से गूँज उठा।
आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने 251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में सहभागिता करते हुए साधकों को संबोधित किया। उन्होंने जन्म-शताब्दी वर्ष 2026 तथा दिव्य अखंड दीपक के 100 वर्ष की महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कालखंड आत्मदीप जागरण का है। उन्होंने सभी को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रत्येक साधक का कर्तव्य है कि अपने भीतर के प्रकाश को प्रज्वलित कर समाज में उजियारा फैलाएँ।
इस पावन अवसर पर आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी के सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में गायत्री परिवार द्वारा 108 जोड़ों का वैदिक विवाह संस्कार पूर्ण वैदिक विधि-विधान से संपन्न हुआ। बिना दहेज, बिना दिखावे, सादगी, संस्कार और ऋषि-परंपरा की शुचिता के साथ संपन्न यह विवाह संस्कार समाज के लिए एक प्रेरणादायी संदेश रहा।
डॉ. साहब ने कार्यक्रम में सम्मिलित सभी माननीय वरिष्ठ एवं प्रमुख सदस्यों को सम्मान प्रदान करते हुए हरिद्वार में आयोजित होने वाले जन्म-शताब्दी समारोह 2026 हेतु सादर आमंत्रित किया।
इसके पश्चात वे सीधे भोजन व्यवस्था हेतु सरायपाली (महासमुंद) से आए 150 कर्मठ परिजनों से भावपूर्ण मुलाक़ात हेतु भोजनालय पहुँचे और आत्मीय संवाद किया।
