साधना से होता है साधक का जीवन निर्मल- डॉ. पण्ड्या
साधना साधक को प्रभु प्रेम के निकट पहुंचाता है- श्रद्धेय डॉ.प्रणव पण्ड्या
हरिद्वार 12 अप्रैल।इन दिनों गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में हजारों लोग त्रिकाल संध्या में सामूहिक जप एवं सत्संग में जुटे हैं। नवरात्र साधना के चौथे दिन प्रातःकालीन सत्संग सभा में अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने गायत्री साधकों को श्रीरामचरित मानस में माता शबरी की योगसाधना पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गायत्री साधना से साधक में एक विशेष प्रकार का आभामंडल बनता है, जो उसके जीवन को निर्मल और पवित्र बनाता है। साधना साधक को प्रभु प्रेम के निकट पहुंचाता है। साधना काल में सत्संग व श्रेष्ठ साहित्यों के अध्ययन से साधक के मन के बुरे विचार दूर होते हैं। सत्संग से पवित्र विचार आते हैं, जो वाणी में सत्यता का संचार करते हैं। चहुंओर मान-सम्मान बढ़ता है। जीवन के अनेक जिज्ञासाओं के समाधान भी हमें सत्संग के माध्यम से मिल जाते हैं। स्वाध्याय से ईश्वर भक्ति की प्राप्ति भी होती है। युवा उत्प्रेरक श्रद्धेय डॉ. पण्ड्या ने कहा कि जिस तरह प्रभु श्रीराम के सान्निध्य पाकर अनेक जीवों का जीवन सफल हो गया था। उसी तरह वर्तमान समय में विचारों से श्रेष्ठ संतों के सानिध्य व उनके उपदेश जीवन को ऊँचा उठाने में सहायक हैं।
प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक श्रद्धेय डॉ. पण्ड्या ने कहा कि साधना काल में ब्रह्मचर्य यानि ब्रह्म में विचरण करना चाहिए। इससे शारीरिक व मानसिक दृढ़ता बढ़ती है। आत्मोन्नति का द्वार खुलता है। शांतिकुंज मीडिया विभाग के अनुसार सत्संग के इस प्रवाह से देश-विदेश के लाखों परिजन भी वर्चुअली जुड़ते हैं। यह प्रवाह रामनवमी तक अनवरत चलेगा।
इससे पूर्व शांतिकुंज के युगगायकों द्वारा प्रस्तुत नवधा भक्ति के सुमधुर गान ने उपस्थित हजारों साधकों को भक्तिभाव के रंग में रंग दिया। इस अवसर पर शांतिकुंज के अनेक कार्यकर्तागण सहित देश विदेश से आये हजारों साधक मौजूद रहे।
Recent Post
Where Values Were Worshipped, Not Monuments
‘Sajal Shraddha – Prakhar Pragya’ ritual held ahead of Birth Centenary celebrations
Haridwar | December 16
Some moments do not merely become part of history; the...
जन्मशताब्दी समारोह स्थल में जहाँ स्मारक नहीं, संस्कार पूजे गए
आयोजन से पूर्व युगऋषिद्वय की पावन स्मारक का हुआ विशेष पूजन कार्यक्रम
हरिद्वार 16 दिसंबर।
कुछ क्षण ऐसे होते हैं जो इतिहास नहीं बनते, बल्कि इतिहास को दिशा देते हैं। अखिल विश्व ...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 130): स्थूल का सूक्ष्मशरीर में परिवर्तन— सूक्ष्मीकरण
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 129): स्थूल का सूक्ष्मशरीर में परिवर्तन— सूक्ष्मीकरण
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 128): स्थूल का सूक्ष्मशरीर में परिवर्तन— सूक्ष्मीकरण
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 127): स्थूल का सूक्ष्मशरीर में परिवर्तन— सूक्ष्मीकरण
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 126): तपश्चर्या— आत्मशक्ति के उद्भव हेतु अनिवार्य
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 125): तपश्चर्या— आत्मशक्ति के उद्भव हेतु अनिवार्य
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 124): तपश्चर्या— आत्मशक्ति के उद्भव हेतु अनिवार्य
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 123): तपश्चर्या— आत्मशक्ति के उद्भव हेतु अनिवार्य:
Read More
