अपने ऊपर भरोसा करो!
यदि आप चाहते हैं कि दूसरे लोग आपके ऊपर भरोसा करें तो इसका सबसे सुलभ और सुनिश्चित उपाय यह है कि आप अपने ऊपर भरोसा करें। दुनिया में ऐसे अनेक मनुष्य हैं जिन पर कोई भरोसा नहीं करता, उन्हें गैर जिम्मेदार और बेपैंदी का समझा जाता है तथा जगह जगह दुत्कारा जाता है। ऐसे मनुष्य अपने आपे के प्रति अविश्वासी होते हैं। उनके चेहरे से, भावभंगिमा से, वाणी से, यह स्पष्ट रूप से प्रकट होता रहता है कि वह अपने आपके ऊपर भरोसा नहीं करता।
बाहर के मनुष्य हमें उसी नाम से पुकारते हैं कि जो हम अपना नाम उनके सामने प्रकट करते हैं। जब हमारी भावभंगिमा और वाणी से दीनता तुच्छता, असमर्थता, निराशा, निर्बलता, असमर्थता प्रकट होती है तो तुरन्त ही दूसरे लोग भी हमें वैसे ही मान लेते हैं और तदनुसार ही हमारे साथ व्यवहार करते हैं। जो लोग साहस पूर्वक किसी काम के करने के लिए खड़े होते हैं और यह घोषित करते हैं कि हम इस काम को पूरा करेंगे, देखा गया है कि वे लोग सफल हो भी जाते हैं। ईश्वर मर्दों का मददगार है। वह उन लोगों की सहायता करता है जो अपनी सहायता आप करने को तत्पर होते हैं।
आपके सामने आज जो कार्यक्रम है उसे पूरी दिलचस्पी के साथ पूरा करने का प्रयत्न कीजिए अपनी योग्यता, बुद्धिमत्ता और कर्मशीलता पर पूरा भरोसा रखिए। सारी शक्ति को एकत्रित करके अपने उद्देश्य को पूरा करने में इस प्रकार प्रवृत्त हूजिए मानो सफलता प्राप्त करने के लिए आपने प्राण प्रण से निश्चय कर लिया है। छिछोरपन और हीनता की वाणी बोलना छोड़िए और गंभीरता उत्साहपूर्ण आशा तथा दृढ़ता के साथ कार्य करना सीखिए। याद रखिए-इस दुनिया में सफलता उसे मिलेगी जो आत्म विश्वासी होगा।
अखण्ड ज्योति सितम्बर 1944 पृष्ठ 11
Recent Post
Where Values Were Worshipped, Not Monuments
‘Sajal Shraddha – Prakhar Pragya’ ritual held ahead of Birth Centenary celebrations
Haridwar | December 16
Some moments do not merely become part of history; the...
जन्मशताब्दी समारोह स्थल में जहाँ स्मारक नहीं, संस्कार पूजे गए
आयोजन से पूर्व युगऋषिद्वय की पावन स्मारक का हुआ विशेष पूजन कार्यक्रम
हरिद्वार 16 दिसंबर।
कुछ क्षण ऐसे होते हैं जो इतिहास नहीं बनते, बल्कि इतिहास को दिशा देते हैं। अखिल विश्व ...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 130): स्थूल का सूक्ष्मशरीर में परिवर्तन— सूक्ष्मीकरण
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 129): स्थूल का सूक्ष्मशरीर में परिवर्तन— सूक्ष्मीकरण
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 128): स्थूल का सूक्ष्मशरीर में परिवर्तन— सूक्ष्मीकरण
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 127): स्थूल का सूक्ष्मशरीर में परिवर्तन— सूक्ष्मीकरण
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 126): तपश्चर्या— आत्मशक्ति के उद्भव हेतु अनिवार्य
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 125): तपश्चर्या— आत्मशक्ति के उद्भव हेतु अनिवार्य
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 124): तपश्चर्या— आत्मशक्ति के उद्भव हेतु अनिवार्य
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 123): तपश्चर्या— आत्मशक्ति के उद्भव हेतु अनिवार्य:
Read More
